एनपीएस: 80% कैश विड्रॉल नियम

 
एनपीएस: 80% कैश विड्रॉल नियम

भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग का नाम आते ही पहले लोगों के दिमाग में सिर्फ ईपीएफ (EPF) या पीपीएफ (PPF) की छवि उभरती थी। लेकिन 2025 के अंत तक आते-आते, निवेश की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अब केवल एक सरकारी योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह NPS 2.0 के रूप में एक आधुनिक और शक्तिशाली वेल्थ क्रिएशन टूल बन चुका है।

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है—80% एकमुश्त (Lump sum) निकासी का नया नियम। इस एक नियम ने एनपीएस की सबसे बड़ी कमजोरी यानी 'लिक्विडिटी' की समस्या को खत्म कर दिया है। आज के इस विस्तृत लेख में हम समझेंगे कि एनपीएस 2.0 क्या है, इसके नए नियम आपके भविष्य को कैसे सुरक्षित बना सकते हैं और क्यों यह हर भारतीय के पोर्टफोलियो में होना चाहिए।

एनपीएस का विकास: "कठोर" से "स्मार्ट" निवेश तक

दशकों से एनपीएस को एक "लॉक-इन" वाले उत्पाद के रूप में देखा जाता था। हालांकि इसमें मिलने वाले मार्केट-लिंक्ड रिटर्न और कम फंड मैनेजमेंट चार्ज आकर्षक थे, लेकिन इसके निकासी के नियम निवेशकों को डराते थे। पहले नियम यह था कि रिटायरमेंट के समय आपको कुल फंड का कम से कम 40% हिस्सा एन्युइटी (Annuity) यानी मंथली पेंशन प्लान खरीदने में लगाना पड़ता था, और केवल 60% हिस्सा ही आप कैश के रूप में निकाल सकते थे।

बहुत से निवेशकों के लिए यह 40% की शर्त एक बड़ी बाधा थी क्योंकि एन्युइटी पर मिलने वाला ब्याज अक्सर महंगाई दर से कम होता था। निवेशक अपने पैसे पर खुद का नियंत्रण चाहते थे।

यहीं से शुरुआत होती है एनपीएस 2.0 की।

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के नए नियमों के अनुसार, अब नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर रिटायरमेंट पर अपने कुल कॉर्पस का 80% हिस्सा एकमुश्त कैश (Lump Sum) के रूप में निकाल सकते हैं। अब केवल 20% हिस्सा ही एन्युइटी के लिए अनिवार्य रखा गया है।

80% नियम के मायने और फायदे

यह केवल 20% अतिरिक्त कैश की बात नहीं है, यह वित्तीय स्वतंत्रता की बात है। 60 वर्ष की आयु में 80% फंड आपके हाथ में होने से आप:

  1. हाई-यील्ड एसेट्स में निवेश: आप कम ब्याज वाली एन्युइटी के बजाय उस 80% पैसे को म्यूचुअल फंड के SWP (Systematic Withdrawal Plan) या सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS) में डाल सकते हैं।

  2. कर्ज से मुक्ति: रिटायरमेंट के समय बचे हुए होम लोन या अन्य देनदारियों को तुरंत खत्म कर सकते हैं।

  3. महंगाई से लड़ने की शक्ति: बड़ा फंड होने पर आप उसे ऐसी जगह निवेश कर सकते हैं जो बढ़ती महंगाई को मात दे सके।

एनपीएस 2.0 का निवेश ब्रह्मांड: विविधता का नया दौर

एनपीएस 2.0 में केवल पैसा निकालने के नियम ही नहीं बदले हैं, बल्कि पैसा लगाने के विकल्पों में भी भारी विस्तार हुआ है। 1 अक्टूबर 2025 से लागू मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) ने निवेश के दायरे को काफी बढ़ा दिया है।

1. नए एसेट क्लासेज (Asset Classes)

अब आपका पैसा केवल लार्ज-कैप स्टॉक्स या सरकारी बॉन्ड्स तक सीमित नहीं है। एनपीएस अब इन क्षेत्रों में भी निवेश करता है:

  • IPOs (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग): आप नई और उभरती कंपनियों की ग्रोथ का हिस्सा बन सकते हैं।

  • REITs और InvITs: रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के जरिए आप भारत के बुनियादी ढांचे के विकास से लाभ कमा सकते हैं।

  • गोल्ड और सिल्वर ETFs: मार्केट की अस्थिरता से बचने के लिए अब आप अपने एनपीएस खाते में सोने और चांदी में भी निवेश कर सकते हैं।

2. एक्टिव बनाम ऑटो चॉइस

  • एक्टिव चॉइस (Active Choice): यहां आप खुद तय करते हैं कि आपका कितना पैसा इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड (C), या सरकारी बॉन्ड (G) में जाएगा। आप इक्विटी में 75% तक आवंटन कर सकते हैं।

  • ऑटो चॉइस (Auto Choice): यह उन लोगों के लिए है जो निवेश करके भूल जाना चाहते हैं। इसमें उम्र के साथ आपका पैसा अपने आप रिस्की एसेट्स (इक्विटी) से सुरक्षित एसेट्स (डेट) की ओर शिफ्ट होता रहता है।

टैक्स बेनेफिट्स: बचत का "ट्रिपल धमाका"

एनपीएस 2.0 का सबसे बड़ा आकर्षण इसका टैक्स ढांचा है। भारत की मौजूदा टैक्स व्यवस्था में यह एक 'अनिवार्य' निवेश बन गया है।

पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) वालों के लिए:

  • धारा 80C: ₹1.5 लाख की सीमा के भीतर लाभ।

  • धारा 80CCD(1B): इसके तहत ₹50,000 की अतिरिक्त कटौती मिलती है। यह 80C की ₹1.5 लाख की लिमिट के ऊपर है। यानी कुल ₹2 लाख की टैक्स बचत।

नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) वालों के लिए:

बजट 2025 के बाद नई टैक्स व्यवस्था में एनपीएस और भी ज्यादा फायदेमंद हो गया है:

  • धारा 80CCD(2): अब एम्प्लॉयर (कंपनी) कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 14% तक हिस्सा एनपीएस में योगदान कर सकता है। यह पूरा हिस्सा कर्मचारी की टैक्स योग्य आय से बाहर होता है। 30% टैक्स ब्रैकेट वालों के लिए यह एक वरदान है।

एनपीएस वात्सल्य: बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव

सरकार ने हाल ही में NPS Vatsalya योजना शुरू की है। अब माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों के लिए भी एनपीएस खाता खोल सकते हैं। जब बच्चा 18 साल का हो जाएगा, तो यह खाता नियमित एनपीएस खाते में बदल जाएगा।

सोचिए, अगर किसी बच्चे का रिटायरमेंट फंड 5 साल की उम्र से शुरू हो जाए, तो 60 साल की उम्र तक 55 साल की कंपाउंडिंग उसे एक ऐसा कॉर्पस देगी जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।

एनपीएस 2.0 को बेहतर बनाने की रणनीति

  1. इक्विटी पर जोर दें: यदि आपकी उम्र 45 से कम है, तो 'एक्टिव चॉइस' चुनें और इक्विटी आवंटन को 75% पर रखें। लंबी अवधि में इक्विटी ही महंगाई को मात देने वाला एकमात्र एसेट क्लास है।

  2. कॉर्पोरेट एनपीएस का उपयोग करें: यदि आपकी कंपनी यह सुविधा देती है, तो अपनी सैलरी का 14% हिस्सा एनपीएस में जरूर डलवाएं। यह आपकी टैक्स देनदारी को काफी कम कर देगा।

  3. टियर-II खाते का उपयोग: अगर आपके पास सरप्लस कैश है, तो एनपीएस टियर-II खाते को म्यूचुअल फंड के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करें, क्योंकि इसमें कोई लॉक-इन नहीं होता और फंड मैनेजमेंट चार्ज बहुत कम होते हैं।

निष्कर्ष: क्या आपको एनपीएस 2.0 में निवेश करना चाहिए?

80% कैश निकासी नियम के साथ, एनपीएस अब एक "प्रतिबंधित" योजना से बदलकर एक "लचीली" और "ग्रोथ-ओरिएंटेड" योजना बन गई है।

यह किसके लिए है?

  • वेतनभोगी पेशेवर: जो ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट और कंपनी के योगदान का लाभ उठाना चाहते हैं।

  • व्यापारी और स्वरोजगार: जो अपने लिए एक अनुशासित रिटायरमेंट फंड बनाना चाहते हैं।

  • युवा निवेशक: जो दुनिया के सबसे कम खर्च वाले निवेश उत्पाद का लाभ उठाकर लंबी अवधि में करोड़ों का फंड बनाना चाहते हैं।

रिटायरमेंट कोई उम्र नहीं है, यह एक वित्तीय स्थिति है। एनपीएस 2.0 आपको वह स्थिति हासिल करने में मदद करता है। 80% नियंत्रण अब आपके हाथ में है, तो अपनी "गोल्डन इयर्स" को सच में सुनहरा बनाने की शुरुआत आज ही करें।

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